Almost Thirty Thousand Crore Turnover In The Market At India On Diwali 2018 – खत्म हुआ बाजार में नोटबंदी व जीएसटी का असर, दिखी रौनक

दिवाली के दिन बाजार
– फोटो : अमर उजाला

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अर्थव्यवस्था के नोटबंदी तथा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली के साये से निकलने का पुख्ता प्रमाण मिल गया है। इस वर्ष दिवाली के दौरान देशभर के बाजारों में 30 हजार करोड़ रुपये का कारोबार हुआ, जो कि पिछली दिवाली के मुकाबले 15 फीसदी ज्यादा है। पिछले साल तो बाजार नोटबंदी और जीएसटी के साये से उबर नहीं पाया था। हालांकि, इस बार दिवाली से पहले ही प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा चलाए गए तीन सेल की वजह से परंपरागत कारोबारियों का कारोबार कम रहा।

 
कंफेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के  राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया कि बीते चार वर्षों से दिवाली पर कारोबारी मंदी का माहौल झेल रहे थे, लेकिन इस बार पिछले वर्ष के मुकाबले दिल्ली सहित देशभर में व्यापारियों ने अच्छा कारोबार किया है।  उन्होंने उम्मीद जताई की नवरात्रि से शुरू हुआ त्योहारी मौसम, जो अगले वर्ष मार्च तक जारी रहेगा, इसमें व्यापारियों को कारोबार का बेहतर अवसर मिलता रहेगा। उनका कहना है कि दिवाली में इस तरह की खरीदारी होगी, इसका अनुमान न तो व्यापारी नेताओं को था और न ही कारोबारियों को। लेकिन लोगों ने खरीदारी की है, इसका मतलब है कि उनके मन से नोटबंदी और जीएसटी का डर एकदम निकल गया है।  

 
ई-कॉमर्स की वजह से खरीदारी में कमी
कैट का कहना है कि यदि सरकार ऑनलाइन कारोबार पर अंकुश लगाती तो इससे भी ज्यादा का कारोबार होता क्योंकि ऑनलाइन बिक्री के कारण व्यापारियों को काफी घाटा हुआ है। कैट के अनुसार इस वर्ष पर दिवाली पर लगभग 30 हजार करोड़ का व्यापार हुआ, जो पिछले साल लगभग 25 हजार करोड़ रुपये का था। 

 
सिर्फ दिल्ली में 5,000 करोड़ का कारोबार
सिर्फ दिल्ली की ही बात करें तो यहां ही लगभग पांच हजार करोड़ रुपये का व्यापार हुआ। इस खरीदारी में खासतौर पर उपभोक्ता की दैनिक उपभोग की वस्तुएं, इलेक्ट्रॉनिक्स, बिजली का सामान, सजावटी सामान, गिफ्ट आइटम, ड्राई फ्रूट, बिस्कुट, रेडीमेड कपड़े, कंप्यूटर एवं कंप्यूटर का सामान, पेंट, हार्डवेयर, खाद्यान की वस्तुएं, मिठाई, नमकीन, केक, चाकलेट और किचन का सामान आदि मुख्य हैं।

 
ई-कॉमर्स पर लगाम लगाए सरकार
ई-कॉमर्स व्यापार देश में बिना किसी सरकारी लगाम के चल रहा है, जिसके कारण व्यापारियों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। देश में ई-कॉमर्स के लिए कोई कठोर कानून न होने के कारण ऑनलाइन कंपनियां बाजार से प्रतिस्पर्धा को खत्म करने और अपना एकाधिकार जमाने के लिए अपनी मनमर्जी से लागत से भी कम मूल्य पर माल बेच रही हैं, जो एफडीआई नीति के विरुद्ध है। कैट ने सरकार से ऑनलाइन कंपनियों के लिए तुरंत ई-कॉमर्स पॉलिसी बनाने और ई-कॉमर्स के लिए एक नियामक संस्था (रेगुलेटरी अथारिटी) गठित करने की मांग की है।

अर्थव्यवस्था के नोटबंदी तथा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली के साये से निकलने का पुख्ता प्रमाण मिल गया है। इस वर्ष दिवाली के दौरान देशभर के बाजारों में 30 हजार करोड़ रुपये का कारोबार हुआ, जो कि पिछली दिवाली के मुकाबले 15 फीसदी ज्यादा है। पिछले साल तो बाजार नोटबंदी और जीएसटी के साये से उबर नहीं पाया था। हालांकि, इस बार दिवाली से पहले ही प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा चलाए गए तीन सेल की वजह से परंपरागत कारोबारियों का कारोबार कम रहा।

 

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